S-400 की जरूरत नहीं! भारत का ‘KALI’ प्रोजेक्ट बनेगा चीन के J-20 का काल, पलक झपकते जला देगा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम

भारत अपनी वायु रक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक ऐसे हथियार पर काम कर रहा है, जिसके सामने चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर J-20 भी पानी भरता नजर आएगा। इसे ‘प्रोजेक्ट काली’ (KALI) कहा जा रहा है। डीआरडीओ और बार्क द्वारा विकसित यह प्रणाली किसी मिसाइल के बजाय ‘हाई-एनर्जी माइक्रोवेव’ का इस्तेमाल करती है, जो दुश्मन के विमान के रडार और कंप्यूटर सिस्टम को हवा में ही जलाकर राख कर देती है।

कैसे काम करता है काली? काली एक ‘डायरेक्टेड एनर्जी वेपन’ (DEW) है। यह उच्च-शक्ति वाली इलेक्ट्रॉन बीम छोड़ता है जो माइक्रोवेव में बदल जाती है। जब यह बीम J-20 जैसे विमान से टकराती है, तो विमान का AESA रडार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह खराब हो जाते हैं। विमान शारीरिक रूप से सुरक्षित दिखने के बावजूद उड़ने लायक नहीं रहता और गिर जाता है।

चीन पर बढ़त: चीन के पास भी इसी तरह की तकनीक है, लेकिन भारत का काली-5000 और 10000 मॉडल कहीं अधिक शक्तिशाली हैं। हालांकि, इसका वजन (लगभग 26 टन) और मोबिलिटी एक चुनौती है, लेकिन रणनीतिक रक्षा के लिए यह भारत का सबसे बड़ा ट्रम्प कार्ड है। अगर भारत इसे और हल्का और मोबाइल बना लेता है, तो यह किसी भी स्टील्थ फाइटर के लिए एक जीता-जागता दुःस्वप्न बन जाएगा।

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