वॉट्सऐप की डेटा चोरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; कहा- संविधान नहीं मान सकते तो भारत से बाहर जाएं

सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप और उसकी मूल कंपनी मेटा को डेटा प्राइवेसी और प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया कि व्यावसायिक लाभ के लिए भारतीय यूजर्स के व्यक्तिगत डेटा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने यहाँ तक कह दिया कि अगर कंपनियां भारतीय संविधान और कानूनों का पालन नहीं कर सकतीं, तो उन्हें भारत छोड़ देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: सीजेआई ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि वॉट्सऐप पर डॉक्टर को बीमारी की जानकारी देने के तुरंत बाद विज्ञापनों की बाढ़ आ जाती है। यह निजता का सीधा उल्लंघन है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या बिहार के किसी सुदूर गांव का व्यक्ति या कोई रेहड़ी-पटरी वाला आपकी जटिल प्राइवेसी पॉलिसी समझ सकता है? कोर्ट ने इसे “व्यक्तिगत डेटा की चोरी” करार दिया।
अंतरिम आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप को आदेश दिया है कि वह सुनवाई पूरी होने तक किसी भी यूजर का डेटा मेटा के साथ साझा न करे। केंद्र सरकार ने इस नीति को “शोषणकारी” बताया है। हालांकि मेटा के वकीलों ने ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ का तर्क दिया, लेकिन कोर्ट ने डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।