AI वीडियो बनाने वाले सावधान! 20 फरवरी से लागू हो रहा है नया कानून, एक गलती और सीधे जेल

भारत सरकार ने डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए ‘आईटी संशोधन नियम 2026’ को नोटिफाई कर दिया है। ये नियम विशेष रूप से एआई जनित कंटेंट और डीपफेक वीडियो पर लगाम लगाने के लिए बनाए गए हैं, जो 20 फरवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे।

3 घंटे की डेडलाइन: नए नियमों के तहत, भ्रामक एआई कंटेंट को हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर मात्र 3 घंटे कर दी गई है। सरकार का मानना है कि गलत सूचना को शुरुआती वायरल फेज में ही रोकना जरूरी है। यदि कोई प्लेटफॉर्म अदालत या सक्षम अधिकारी द्वारा फ्लैग किए गए कंटेंट को 3 घंटे के भीतर नहीं हटाता है, तो उसे आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा खोनी पड़ेगी। यानी, उस प्लेटफॉर्म पर मौजूद गैर-कानूनी कंटेंट के लिए कंपनी सीधे जिम्मेदार होगी।

लेबलिंग और यूजर डिक्लेरेशन: अब एआई से बने फोटो, वीडियो या ऑडियो पर साफ लेबल और मेटाडेटा होना अनिवार्य होगा। साथ ही, कंटेंट अपलोड करते समय यूजर को यह घोषणा करनी होगी कि यह एआई द्वारा निर्मित है या नहीं। प्लेटफॉर्म्स को ऑटोमेटेड टूल्स के जरिए इसकी सत्यता की जांच करनी होगी। चुनाव, सामाजिक स्थिरता और व्यक्तिगत सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये नियम डिजिटल इंडिया के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे।

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