क्या स्पेस में गूंजेगी बच्चे की किलकारी? वैज्ञानिकों ने ‘स्पेस बेबी’ को लेकर दी बड़ी चेतावनी

इंसान अब सिर्फ अंतरिक्ष की सैर तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वहां बस्तियां बसाने के सपने देख रहा है। चंद्रमा और मंगल पर इंसानी कॉलोनी की चर्चाओं के बीच एक बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या अंतरिक्ष में बच्चे को जन्म देना संभव है? हाल ही में ‘रिप्रोडक्टिव बायोमेडिसिन ऑनलाइन’ जर्नल में प्रकाशित एक नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी ने इस विषय पर गंभीर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘स्पेस रिप्रोडक्शन’ तकनीकी रूप से तो संभव दिख रहा है, लेकिन जैविक रूप से यह एक बेहद खतरनाक मिशन साबित हो सकता है।

९ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, अंतरिक्ष अब केवल एक वर्कप्लेस नहीं रह गया है। पर्यटक अब कमर्शियल फ्लाइट्स के जरिए स्पेस जा रहे हैं और अंतरिक्ष यात्री वहां महीनों बिता रहे हैं। ऐसे में प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) अब केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती बन गया है। वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष की परिस्थितियों को इंसानी भ्रूण और प्रजनन क्षमता के लिए बेहद प्रतिकूल बताया है।

अंतरिक्ष में सबसे बड़ा खतरा कॉस्मिक रेडिएशन है। यह घातक किरणें महिलाओं के मासिक चक्र (Menstrual Cycle) को प्रभावित कर सकती हैं और कैंसर का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा, माइक्रो ग्रेविटी यानी गुरुत्वाकर्षण की कमी भ्रूण के विकास और हड्डियों की संरचना पर बुरा असर डाल सकती है। अंतरिक्ष में दिन-रात का चक्र (Circadian Rhythm) भी बिगड़ जाता है, जिसका सीधा असर मानव शरीर के हार्मोनल संतुलन पर पड़ता है।

हालांकि, विज्ञान ने कुछ समाधान भी खोजे हैं। स्टडी के अनुसार, धरती पर सफल एआरटी (Assisted Reproductive Technology) जैसे आईवीएफ (IVF) और एग-स्पर्म फ्रीजिंग (Cryopreservation) की तकनीकों को अब अंतरिक्ष के लिए भी ऑटोमेटेड और पोर्टेबल बनाया जा रहा है। जेनेटिक स्क्रीनिंग के जरिए अंतरिक्ष में विकसित होने वाले भ्रूण की आनुवंशिक बीमारियों की जांच करना भी संभव हो सकता है।

लेकिन सबसे बड़ी समस्या नियमों और नैतिकता की है। नासा के विशेषज्ञ डॉ. फाथी करुइया और गाइल्स पामर का कहना है कि तकनीक तो तैयार हो रही है, लेकिन नियम (Governance) अब भी पीछे हैं। यदि किसी मिशन के दौरान अनियोजित गर्भधारण (Unplanned Pregnancy) होता है या रेडिएशन के कारण कोई अंतरिक्ष यात्री बांझपन का शिकार हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या अंतरिक्ष में पैदा होने वाले बच्चे के जीन में बदलाव करना नैतिक होगा? इन सवालों के जवाब अभी तक दुनिया के पास नहीं हैं।

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