सावधान! अब रेस्टोरेंट में ज्यादा देर बैठे तो लगेगा ‘जुर्माना’, बेंगलुरु के होटल मालिकों का बड़ा फैसला

दिल्ली की गुलाबी ठंड में आप दोस्तों के साथ कॉफी पीने निकले और गप्पों में इतने मशगूल हो गए कि समय का पता ही नहीं चला। लेकिन जब बिल आया, तो आपकी आंखें फटी की फटी रह गईं। ५०० रुपये का बिल १५०० रुपये हो गया! पूछने पर पता चला कि यह ‘टेबल ऑक्यूपेंसी चार्ज’ है। बेंगलुरु के रेस्टोरेंट मालिक अब इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहे हैं।

आईटी सिटी बेंगलुरु के रेस्टोरेंट और कैफे मालिक उन ग्राहकों से परेशान हैं जो घंटों तक टेबल घेरकर बैठते हैं और ऑर्डर के नाम पर सिर्फ एक कप कॉफी मंगवाते हैं। अक्सर देखा जाता है कि लोग रेस्टोरेंट को अपना ‘ऑफिस’ समझ लेते हैं और वहां रियल एस्टेट सौदों से लेकर लंबी राजनीतिक चर्चाएं करते रहते हैं। इससे उन ग्राहकों को जगह नहीं मिलती जो खाना खाने के लिए कतार में खड़े रहते हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ब्रुहत बेंगलुरु होटल ओनर्स एसोसिएशन’ ने अपनी हालिया बैठक में व्यस्त घंटों के दौरान टेबल टर्नओवर को मैनेज करने के लिए ‘टेबल चार्ज’ लगाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि इसका कोई कानूनी आधार अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन कई होटलों ने पहले ही बोर्ड लगा दिए हैं कि टेबल केवल खाने के लिए है, लंबी मीटिंग्स के लिए नहीं।

एसोसिएशन के अध्यक्ष पीसी राव का कहना है कि यह कदम रेस्टोरेंट के बिजनेस को बचाने के लिए जरूरी है। उनका तर्क है कि लंबे समय तक बैठे रहने वाले समूह माहौल को प्रभावित करते हैं और दूसरे ग्राहकों का रास्ता रोकते हैं। इस प्रस्ताव के तहत, भोजन समाप्त होने के बाद भी टेबल न छोड़ने वालों से अतिरिक्त शुल्क वसूला जा सकता है।

इस मुद्दे ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। कुछ लोग होटल मालिकों के हक में हैं, तो कुछ का कहना है कि कैफे कल्चर फुर्सत के लिए होता है और वहां समय की पाबंदी लगाना गलत है। अब देखना यह है कि क्या बेंगलुरु का यह ‘पेनल्टी सिस्टम’ देश के अन्य शहरों में भी पहुंचेगा या नहीं।

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