संसद में महासंग्राम! 120 सांसदों ने स्पीकर के खिलाफ खोला मोर्चा, क्या है अभिषेक बनर्जी की शर्त?

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने एक बड़ा मोर्चा खोलते हुए मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव का औपचारिक नोटिस दाखिल कर दिया है। कांग्रेस के मुख्य सचेतक के. सुरेश ने लोकसभा सचिवालय में यह नोटिस सौंपा, जिसके बाद सदन की राजनीति गरमा गई है। सूत्रों के अनुसार, स्पीकर बिरला ने खुद इस नोटिस की समीक्षा के लिए महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिए हैं।

इस नोटिस पर कांग्रेस, डीएमके और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी गठबंधन के लगभग 120 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात तृणमूल कांग्रेस (TMC) की दूरी रही। टीएमसी के किसी भी सांसद ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। अभिषेक बनर्जी ने साफ किया कि उन्हें इस कदम से कोई सैद्धांतिक विरोध नहीं है, लेकिन वे चाहते थे कि पहले ‘इंडिया’ गठबंधन की ओर से एक संयुक्त बयान जारी हो। प्रक्रिया का पालन न होने के कारण टीएमसी ने फिलहाल इस पर हस्ताक्षर करने से परहेज किया है।

विपक्ष का आरोप है कि बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने का उचित अवसर नहीं दिया गया। साथ ही, आठ सांसदों के निलंबन को भी तानाशाही करार दिया गया है। विपक्ष का कहना है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष नहीं चल रही है, इसलिए उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। दूसरी ओर, भाजपा ने इसे पूरी तरह से ‘पॉलिटिकल ड्रामा’ बताया है। संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करने की आदत बना चुका है।

संवैधानिक प्रावधानों के तहत, अनुच्छेद 94(C) के अनुसार स्पीकर को हटाने के लिए सदन में बहुमत की आवश्यकता होती है। नियम कहते हैं कि 14 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य है। यदि नोटिस स्वीकार हो जाता है, तो चर्चा के दौरान उपाध्यक्ष या राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य सदन की कमान संभालते हैं। वर्तमान संख्या बल को देखते हुए इस प्रस्ताव का पारित होना मुश्किल लग रहा है, लेकिन इसने गठबंधन की एकता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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