गवाह से पहले ही खुल जाएगी डिफेंस की पोल? कर्नाटक हाईकोर्ट के बड़े फैसले ने सबको चौंकाया!

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक हत्या के मामले में आरोपी दो २२ वर्षीय युवकों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने मामले के एक मुख्य चश्मदीद गवाह की जिरह (Cross-examination) को फिलहाल स्थगित करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि आरोपियों की बचाव रणनीति (Defense Strategy) समय से पहले उजागर न हो, जिससे उनके मुकदमे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था।

न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्न ने ३ फरवरी को अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि इस मामले में कई गवाह एक ही घटना के चश्मदीद हैं और वे आपस में निकट संबंधी भी हैं। ऐसे में आरोपियों की यह चिंता वाजिब है कि यदि पहले ही गवाह से जिरह की गई, तो बचाव पक्ष का मुख्य आधार सामने आ जाएगा। अदालत ने माना कि ऐसी आशंकाएं केवल काल्पनिक नहीं हैं, बल्कि न्यायिक रूप से मान्यता प्राप्त हैं।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अभियोजन पक्ष के गवाह १ (PW1) की जिरह तब तक के लिए टाल दी जाए, जब तक कि बाकी गवाहों की मुख्य परीक्षा (Examination-in-chief) पूरी नहीं हो जाती। इस आदेश को न्याय के सिद्धांतों की जीत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि आरोपियों को अपना पक्ष मजबूती से रखने का पूरा और निष्पक्ष मौका मिले।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *