हाईकोर्ट के आदेश को राज्य सरकार की चुनौती, मेट्रो पिलर निर्माण पर मचा घमासान

कोलकाता मेट्रो के ऑरेंज लाइन प्रोजेक्ट का भविष्य एक बार फिर अनिश्चितता के भंवर में फंस गया है। चिंगड़ीघाटा मोड़ पर मेट्रो पिलर के निर्माण को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राज्य सरकार ने कोलकाता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें 15 फरवरी तक काम शुरू करने के लिए ट्रैफिक एनओसी (NOC) देने का निर्देश दिया गया था।

मामला केवल 316 वर्ग मीटर भूमि का है, जहां पिलर संख्या 318 और 319 का निर्माण होना है। निर्माण एजेंसी का कहना है कि अगर उन्हें केवल तीन रातों के लिए ट्रैफिक डायवर्जन की अनुमति मिल जाए, तो काम पूरा हो सकता है। हालांकि, राज्य सरकार का तर्क है कि गंगासागर मेला और अन्य उत्सवों के कारण ईएम बाईपास जैसे व्यस्त मार्ग पर यातायात रोकना संभव नहीं है।

मेट्रो अधिकारियों का आरोप है कि राज्य सरकार के असहयोग के कारण परियोजना में देरी हो रही है, जिससे लागत बढ़ रही है। वहीं, हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद राज्य का शीर्ष अदालत का रुख करना यह संकेत देता है कि यह कानूनी लड़ाई अभी और लंबी खिंचेगी। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।

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