कानूनी पेशे की गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं! सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी लॉ डिग्री मामले के आरोपी की जमानत रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा मजहर खान को दी गई जमानत रद्द कर दी है। मजहर खान पर वकीलों को फर्जी कानून (Law) की डिग्री बांटने का गंभीर आरोप है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि यह मामला सिर्फ जालसाजी का नहीं है, बल्कि यह कानूनी पेशे की अखंडता पर सीधा प्रहार है।

अदालत की कड़ी टिप्पणी बेंच ने पाया कि जमानत पर बाहर आने के बाद आरोपी ने अपनी आजादी का दुरुपयोग किया और शिकायतकर्ता वकील को डराने-धमकाने की कोशिश की। कोर्ट ने कहा कि फर्जी डिग्री बनाने का यह संगठित नेटवर्क संस्थान की गरिमा को नुकसान पहुंचा रहा है।

CBI जांच से इनकार हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट का मानना है कि राज्य पुलिस की जांच में अब तक किसी पक्षपात या बाहरी प्रभाव के सबूत नहीं मिले हैं, इसलिए केंद्रीय एजेंसी को मामला सौंपने की जरूरत नहीं है।

क्या था मामला? शिकायतकर्ता जेबा खान के अनुसार, मजहर खान एक बड़ा गिरोह चला रहा था जो फर्जी डिग्री मुहैया कराता था। आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में आपराधिक मामले दर्ज हैं। कर्नाटक के नाम पर फर्जी मेडिकल डिग्री जारी करने के मामले में भी उसे पहले गिरफ्तार किया जा चुका है।

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