बांग्लादेश में ‘लोकतंत्र का महापर्व’ शुरू: शेख हसीना के बिना पहली बार चुनाव, दिल्ली की धड़कनें तेज!
छात्रों के नेतृत्व में हुए खूनी विद्रोह और शेख हसीना के 15 साल लंबे शासन के नाटकीय अंत के बाद आज बांग्लादेश एक नए युग की शुरुआत के लिए वोट डाल रहा है। यह चुनाव भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि बांग्लादेश के साथ हमारी सबसे लंबी थल सीमा साझा होती है। सुबह 7:30 बजे से शुरू हुई वोटिंग शाम 4:30 बजे तक चलेगी, जिसके तुरंत बाद मतगणना शुरू होगी।
सुरक्षा का कड़ा घेरा: शांतिपूर्ण मतदान के लिए करीब 9 लाख सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। राजधानी ढाका सहित पूरे देश में आर्मर्ड पर्सनल कैरियर (APCs) और रैपिड एक्शन टीम्स मुस्तैद हैं। चुनाव आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 90% से अधिक मतदान केंद्रों पर CCTV लगाए हैं और 25,000 बॉडी-वॉर्र्न कैमरों से लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है।
BNP बनाम जमात की सीधी टक्कर: अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद, मैदान अब मुख्य रूप से खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की बीएनपी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के लिए खुला है। सर्वे रिपोर्ट्स के मुताबिक, तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की रेस में सबसे आगे हैं। हालांकि, जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) जैसे नए राजनीतिक मोर्चे उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
भारत की सामरिक चिंताएं: पिछले 18 महीनों में भारत और ढाका के रिश्ते अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। हसीना को भारत में शरण दिए जाने और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों के आरोपों ने तनाव बढ़ाया है। चीन और पाकिस्तान इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश में हैं। भारत करीब से नजर रख रहा है कि क्या नई सरकार दिल्ली के साथ सहयोग करेगी या दक्षिण एशिया में चीन का दबदबा और बढ़ेगा।