यरवदा जेल के कैदियों ने बिछाई दुलरु की बिसात! सजायाफ्ता मुजरिम अब शतरंज में बन रहे हैं ‘ग्रैंडमास्टर’
पुणे की कड़ी सुरक्षा वाली यरवदा सेंट्रल जेल (Yerawada Central Prison) में इन दिनों शतरंज की चालों की गूंज सुनाई दे रही है। सुबह होते ही जेल की लाइब्रेरी में कैदियों की भीड़ जुट जाती है, जहां मेज पर सजे मोहरे और कंप्यूटर पर खुले चेस एप्लिकेशन उनका स्वागत करते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि यहां कोई पेशेवर कोच नहीं, बल्कि उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी ही अपने साथी कैदियों को शतरंज के गुर सिखा रहे हैं।
यरवदा जेल की यह ‘शतरंज क्रांति’ वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। अक्टूबर २०२५ में आयोजित ‘फिडे इंटरकॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप फॉर प्रिजनर्स’ में यरवदा जेल की छह सदस्यीय टीम ने अल साल्वाडोर को हराकर स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर इतिहास रच दिया था। ये सभी खिलाड़ी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। इस सफलता के बाद, अब जेल के अंदर २० अनुभवी कैदी लगभग २०० साथी कैदियों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की ‘परिवर्तन: प्रिजन टू प्राइड’ पहल के तहत शुरू हुआ यह कार्यक्रम अब जेल सुधार का एक बड़ा मॉडल बन गया है। शतरंज न केवल इन कैदियों का मनोरंजन कर रहा है, बल्कि उन्हें धैर्य और रणनीतिक सोच भी सिखा रहा है। जेल प्रशासन का मानना है कि खेल के माध्यम से कैदियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। फिलहाल, यरवदा के ये ‘शतरंज के सिपाही’ आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।