कानपुर लैंबॉर्गिनी कांड: सलाखों के पीछे तंबाकू किंग का बेटा, ड्राइवर को ढाल बनाने की साजिश नाकाम!
उत्तर प्रदेश के चर्चित कानपुर लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट केस में पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। करोड़ों की लग्जरी कार से तबाही मचाने वाले मुख्य आरोपी और तंबाकू कारोबारी के.के. मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यह साबित कर दिया है कि 8 फरवरी को वीआईपी रोड पर काल बनकर दौड़ रही लैंबॉर्गिनी का स्टीयरिंग किसी ड्राइवर के हाथ में नहीं, बल्कि खुद शिवम के हाथों में था।
ड्राइवर का झूठा सरेंडर: इस मामले को दबाने और शिवम को बचाने के लिए रसूख का भरपूर इस्तेमाल किया गया था। बुधवार को मोहन नाम के एक शख्स ने कोर्ट में यह दावा करते हुए आत्मसमर्पण किया था कि हादसे के वक्त वही गाड़ी चला रहा था। बचाव पक्ष ने भी इसी थ्योरी को आगे बढ़ाया था। हालांकि, पुलिस को शुरू से ही दाल में कुछ काला नजर आ रहा था। सघन जांच और घटनास्थल की मैपिंग के बाद पुलिस ने आरोपी के झूठ को बेनकाब कर दिया।
साक्ष्यों ने खोली पोल: पुलिस की जांच टीम ने पिछले 72 घंटों में इलाके के तमाम सीसीटीवी खंगाले। फुटेज में साफ दिखा कि दुर्घटना के तुरंत बाद ड्राइविंग सीट से शिवम मिश्रा ही बाहर निकल रहा था। इसके अलावा, मोबाइल टॉवर लोकेशन और फॉरेंसिक सबूतों ने भी शिवम की मौजूदगी की पुष्टि की। पुलिस ने तकनीकी सबूतों का ऐसा जाल बुना कि शिवम के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा।
कोर्ट में पेशी और रिमांड: गिरफ्तारी के बाद शिवम मिश्रा की पहली तस्वीर भी सामने आ गई है। आज उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी कस्टडी रिमांड की मांग कर सकती है। जांच का मुख्य केंद्र यह होगा कि क्या हादसे के समय शिवम नशे में था और किन परिस्थितियों में उसने नियंत्रण खोया। साथ ही, मोहन द्वारा दिए गए झूठे बयान के पीछे की साजिश का भी पर्दाफाश किया जाएगा।