बांग्लादेश चुनाव में हार के बावजूद जमात-ए-इस्लामी की बड़ी छलांग, क्या भारत की बढ़ेगी टेंशन?

NEWS DESK : बांग्लादेश के संसदीय चुनावों में जमात-ए-इस्लामी ने अपनी सीटों की संख्या में चार गुना बढ़ोतरी कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। शफिकुर रहमान के नेतृत्व में इस कट्टरपंथी संगठन ने पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे इलाकों में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसने नई दिल्ली की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता से दूर रहने के बावजूद, मुख्यधारा की राजनीति में जमात का यह उदय भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
शेख हसीना के जाने के बाद पैदा हुए राजनीतिक शून्य का फायदा उठाते हुए जमात ने जमीनी स्तर पर अपनी पैठ मजबूत की है। हालांकि उन्होंने चुनाव से पहले भारत के प्रति नरम रुख दिखाने की कोशिश की, लेकिन अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर उनका पिछला रिकॉर्ड और कट्टरपंथी विचारधारा अभी भी संदेह पैदा करती है। युवाओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता और राष्ट्रवादी विमर्श ने जमात को बांग्लादेश की राजनीति में एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है।