फर्जी वोटर लिस्ट पर चुनाव आयोग की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, ५ जिलों के AERO पर गिरी गाज!

पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए राज्य के ७ चुनावी अधिकारियों (AERO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है। आयोग ने मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनहीनता और लापरवाही के आरोप में कड़ी कार्रवाई की जाए।
आयोग की इस कार्रवाई की चपेट में कैनिंग पूर्व के दो, सुती, मयनागुड़ी, फरक्का, समशेरगंज और डेबरा के सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारी (AERO) आए हैं। इन पर ‘SIR’ (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट) के काम में भारी गड़बड़ी, विसंगतियों और पद के दुरुपयोग का आरोप है। आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम १९५० की धारा १३सीसी के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए यह कदम उठाया है। राजभवन और नवान्न को भेजे गए संदेश में कहा गया है कि इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई में कोई देरी नहीं होनी चाहिए।
इससे पहले भी चुनाव आयोग ने तथागत मंडल, देवोत्तम दत्तचौधरी, बिप्लब सरकार और सुदीप्त दास नामक ४ अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। इन पर ‘फर्जी’ या ‘भूतिया’ मतदाताओं के नाम अवैध रूप से मतदाता सूची में शामिल करने का गंभीर आरोप था। इस मामले में कार्रवाई में देरी को लेकर मुख्य सचिव को दिल्ली भी तलब किया गया था।
रविवार को जारी नए निर्देशों के अनुसार, चुनाव आयोग ने ‘फॉर्म ७’ (नाम हटाने का आवेदन) के निपटारे के लिए सोमवार तक की समय सीमा तय की है। आयोग ने साफ कर दिया है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की धांधली या प्रशासनिक ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि २०२६ के चुनावों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं।