नरबलि और अंधविश्वास का खौफनाक सच! सुदीपतो सेन की फिल्म ‘चड़क’ देगी कड़ा संदेश

आस्था और अंधविश्वास के बीच की बारीक लकीर जब धुंधली पड़ती है, तो वह कितनी भयावह हो सकती है, इसी सच्चाई को पर्दे पर उतारने आ रही है हिंदी फिल्म ‘चड़क’। ‘द केरल स्टोरी’ जैसी चर्चित फिल्म बनाने वाले सुदीपतो सेन द्वारा निर्मित और शिलादित्य मौलिक द्वारा निर्देशित यह फिल्म 6 मार्च को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

कहानी जो रूह कंपा दे फिल्म की कहानी बंगाल के पारंपरिक ‘चड़क उत्सव’ की पृष्ठभूमि पर आधारित है। चत संक्रांति के समय होने वाले इस उत्सव में भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ शरीर को लोहे के हुक से छेदने और जलते कोयलों पर चलने जैसी कठिन परंपराएं निभाई जाती हैं। फिल्म संजय हलदर की एक कहानी पर आधारित है, जहां एक सुदूर गांव में चड़क की तैयारी के दौरान दो बच्चे गायब हो जाते हैं। बाद में पता चलता है कि धन और समृद्धि के लालच में उनकी ‘नरबलि’ दे दी गई है। यह फिल्म सवाल उठाती है कि क्या 21वीं सदी के भारत में भी धर्म के नाम पर जीवन की बलि देना जायज है?

निर्माता का दृष्टिकोण निर्माता सुदीपतो सेन ने एक वीडियो संदेश में कहा, “चड़क हमारी संस्कृति और उत्सव का हिस्सा है, लेकिन इस फिल्म के जरिए हम एक ऐसी कहानी कह रहे हैं जिसका कहा जाना बहुत जरूरी था। यह फिल्म आपको सोचने और सवाल पूछने पर मजबूर करेगी।” उन्होंने आगे कहा कि आज भी मेट्रो शहरों से लेकर गांवों तक लोग अंधविश्वास की गिरफ्त में हैं, जिसे तोड़ना अनिवार्य है।

कलाकार और संगीत फिल्म में बॉलीवुड और टॉलीवुड के बेहतरीन सितारों का संगम देखने को मिलेगा। ‘भाग मिल्खा भाग’ फेम शाहिदुर रहमान, ‘मिर्जापुर’ फेम शशि भूषण और ‘न्यूटन’ की अंजलि पाटिल मुख्य भूमिकाओं में हैं। वहीं सुब्रत दत्त, कौशिक कर और प्रसून गायेन जैसे मंझे हुए कलाकारों ने भी अहम किरदार निभाए हैं। फिल्म का संगीत विकास ज्योति ने दिया है और शंकर महादेवन की आवाज ने गानों में जान फूंक दी है।

अंधविश्वास के खिलाफ एक बड़ी सामाजिक जंग छेड़ने के लिए तैयार फिल्म ‘चड़क’ इस साल होली के मौके पर दर्शकों के सामने होगी।

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