‘अब हम किसी के गुलाम नहीं’, विदाई भाषण में मोहम्मद यूनुस ने भारत के साथ तल्ख रिश्तों पर साधी चुप्पी

करीब डेढ़ साल तक अंतरिम सरकार की कमान संभालने के बाद, नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने सोमवार को अपना विदाई भाषण दिया। मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को बांग्लादेश को नया प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। अपने संबोधन में यूनुस ने दावा किया कि उनके 18 महीने के कार्यकाल में बांग्लादेश ने अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय गरिमा को बहाल किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब बांग्लादेश किसी दूसरे देश के निर्देशों या सलाह पर निर्भर रहने वाला ‘आज्ञाकारी’ देश नहीं रहा।

बीएनपी की शानदार जीत और नई सरकार अगस्त 2024 में शुरू हुआ अंतरिम शासन अब समाप्त हो रहा है। 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 297 में से 209 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। मंगलवार को नए प्रधानमंत्री और कैबिनेट का शपथ ग्रहण समारोह होगा, जिससे देश में एक बार फिर निर्वाचित सरकार का शासन शुरू होगा।

भारत के साथ बिगड़ते रिश्ते और चुनौतियां यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में भारी गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश ने विदेशी संबंधों में बहुत कम हासिल किया, जबकि भारत के साथ रिश्ते सबसे खराब स्तर पर पहुंच गए। अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हुए हमलों को लेकर भारत ने कई बार चिंता जताई, लेकिन यूनुस प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी। राजनीतिक विश्लेषक नासिरुद्दीन के अनुसार, यूनुस की विदाई के समय बांग्लादेश पहले से कहीं अधिक ध्रुवीकृत और राजनीतिक रूप से कमजोर स्थिति में है। जहां पाकिस्तान के साथ संबंध सुधरे, वहीं निकटतम पड़ोसी भारत के साथ आर्थिक और कूटनीतिक गतिरोध बना रहा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *