पहाड़ में कांग्रेस का ‘एकला चलो रे’! 3 सीटों पर फंसा पेच, क्या अजय एडवर्ड का साथ छोड़ेगी पार्टी?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस ने राज्य की सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का मन बनाया है। दिल्ली हाईकमान ने भी इस पर अपनी सहमति दे दी है। हालांकि, उत्तर बंगाल के पहाड़ क्षेत्र की तीन सीटों—दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कर्सियांग—को लेकर कांग्रेस अभी भी असमंजस की स्थिति में है। सिलीगुड़ी में हुई एक अहम बैठक के बाद केंद्रीय पर्यवेक्षक प्रकाश जोशी ने संकेत दिए कि पहाड़ को लेकर अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा।
गठबंधन या स्वाभिमान की लड़ाई? पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अजय एडवर्ड की पार्टी के साथ गठबंधन किया था। लेकिन इस बार दार्जिलिंग जिला कांग्रेस का एक बड़ा धड़ा अकेले चुनाव लड़कर अपनी जमीनी पकड़ को परखना चाहता है। प्रकाश जोशी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “कांग्रेस कहीं गायब नहीं हुई है, हमारी ताकत बरकरार है। हम उन पुराने नेताओं को महत्व देंगे जिन्होंने बुरे वक्त में भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा।”
पहाड़ की राजनीति और विकास का मुद्दा: जिला अध्यक्ष सुबीन भौमिक ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव आते ही भाजपा पहाड़ों के लिए झूठे वादे करती है, लेकिन वास्तविक विकास केवल कांग्रेस के समय में हुआ है। जीटीए (GTA) और डीजीएचसी (DGHC) जैसी संस्थाएं कांग्रेस की ही देन हैं। पार्टी का मानना है कि पहाड़ की स्थायी समस्याओं का समाधान केवल कांग्रेस ही कर सकती है।
दिल्ली हाईकमान पर टिकी नजरें: पहाड़ की इन 3 सीटों पर गठबंधन होगा या नहीं, इसका फैसला अब दिल्ली दरबार में होगा। स्थानीय नेताओं की राय को आलाकमान तक पहुँचा दिया गया है। फिलहाल, कांग्रेस ‘एकला चलो’ नीति पर जोर दे रही है, लेकिन रणनीतिक रूप से वह किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं कर रही है। अब देखना यह है कि क्या कांग्रेस पहाड़ के दुर्ग में अकेले सेंध लगा पाएगी या फिर उसे गठबंधन का सहारा लेना पड़ेगा।