चुनाव आयोग के आगे झुका नवान्न! 7 अधिकारियों पर गिरी गाज, मुख्य सचिव ने जारी किया सस्पेंशन ऑर्डर

पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रही तनातनी में आखिरकार राज्य सरकार को झुकना पड़ा है। वोटर लिस्ट (SIR) प्रक्रिया में लापरवाही बरतने के आरोप में चुनाव आयोग के निर्देश का पालन करते हुए मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने 7 एईआरओ (AERO) को निलंबित करने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही बशीरहाट के बीडीओ (BDO) को भी निलंबित कर दिया गया है। आयोग के कड़े रुख के बाद नवान्न द्वारा उठाया गया यह कदम प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

दिल्ली का दबाव और FIR: इससे पहले पूर्व मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आयोग के आदेश को राज्य सरकार टाल रही थी। इसी सिलसिले में मुख्य सचिव को दिल्ली भी बुलाया गया था। कड़े समय सीमा के भीतर आज आखिरकार राज्य सरकार ने इन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश भी दे दिया है।

सीएम ममता का रुख: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि भले ही आयोग के दबाव में अधिकारियों को सस्पेंड किया जा रहा है, लेकिन वे पूरी तरह से बेरोजगार नहीं होंगे। सीएम ने कहा, “चुनाव आयोग अधिकारियों को डराने की कोशिश कर रहा है। लेकिन मेरी सरकार अपने अफसरों के साथ खड़ी है। अगर आयोग किसी का डिमोशन करेगा, तो हम उन्हें प्रमोशन देंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि ये अधिकारी चुनाव कार्य से अलग राज्य सरकार के अन्य महत्वपूर्ण विभागों में सेवाएं देते रहेंगे।

प्रशासनिक संदेश: मुख्यमंत्री के बयान से साफ है कि वे अपने अधिकारियों का मनोबल टूटने नहीं देना चाहतीं। जहां एक ओर कानूनी मजबूरियों के कारण निलंबन की कार्रवाई की गई है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों को आश्वस्त किया गया है कि राज्य सरकार उनके हितों की रक्षा करेगी। आयोग की ‘तुगलकी’ नीतियों के खिलाफ ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है।

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