भारत में पहला रोजा कब? नाखुदा मस्जिद ने दी बड़ी जानकारी, यहाँ देखें ईद की संभावित तारीख!

दुनिया भर के मुसलमानों के लिए सबसे मुकद्दस (पवित्र) महीना ‘रमजान’ दस्तक दे चुका है। सऊदी अरब में बुधवार से रोजे की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन भारत में चांद के दीदार को लेकर बनी स्थिति अब साफ होती नजर आ रही है। कोलकाता की ऐतिहासिक नाखुदा मस्जिद ने भारत में रमजान की शुरुआत और ईद-उल-फितर को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

भारत में कब से शुरू होगा रोजा? इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, किसी भी महीने की शुरुआत चांद देखने पर निर्भर करती है। नाखुदा मस्जिद के अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार शाम भारत के किसी भी हिस्से में चांद नहीं देखा गया, जिसके कारण बुधवार को पहली सेहरी नहीं हो सकी। अधिकारियों ने बताया, “अगर बुधवार शाम को चांद नजर आता है, तो भारत में पहला रोजा गुरुवार (१९ फरवरी) को रखा जाएगा।” आज शाम हिलाल कमेटी की बैठक के बाद औपचारिक घोषणा की जाएगी।

ईद-उल-फितर की संभावित तारीख गणना के अनुसार, यदि १९ फरवरी से रमजान शुरू होता है, तो एक महीने की इबादत के बाद १८ मार्च को यह पवित्र महीना समाप्त होगा। ऐसे में १९ या २० मार्च को ईद-उल-फितर यानी मीठी ईद मनाए जाने की प्रबल संभावना है। हालांकि, ईद की अंतिम तारीख शव्वाल के चांद पर निर्भर करेगी।

सऊदी अरब और भारत में अंतर सऊदी अरब में मंगलवार (१७ मार्च) की रात चांद दिखने के कारण वहां बुधवार से रोजे शुरू हो गए हैं। भौगोलिक कारणों से भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में आमतौर पर सऊदी अरब के एक दिन बाद रमजान शुरू होता है।

रमजान का महत्व और कठिन नियम रमजान का महीना आत्म-अनुशासन और खुदा की इबादत का समय है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक अन्न और जल का त्याग करते हैं। सुबह के भोजन को ‘सेहरी’ और शाम को उपवास खोलने की प्रक्रिया को ‘इफ्तार’ कहा जाता है। यह महीना केवल भूखा रहने का नहीं, बल्कि बुराइयों को त्यागने और नेक राह पर चलने का संदेश देता है। अब सबकी निगाहें बुधवार शाम के आसमान पर टिकी हैं।

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