सिंधु जल समझौते के बीच भारत का बड़ा कदम, शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट से पाकिस्तान की खेती होगी बर्बाद?

एक तरफ भीषण गर्मी और दूसरी तरफ गहराता जल संकट, पाकिस्तान के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि ३१ मार्च तक ‘शाहपुर कंडी बैराज’ का निर्माण पूरा होते ही रावी नदी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान नहीं भेजा जाएगा। भारत के इस फैसले से पाकिस्तान के कृषि प्रधान इलाकों में सूखे जैसे हालात पैदा होने की आशंका है।

क्या है शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट? इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव १९८२ में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी। करीब ४ दशकों के इंतजार के बाद अब यह प्रोजेक्ट पूरा होने वाला है। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राणा ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य कठुआ और सांबा जैसे सूखाग्रस्त जिलों को पानी पहुंचाना है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि पाकिस्तान जा रहे अतिरिक्त पानी को रोकना अब अनिवार्य है।

सिंधु समझौते के तहत भारत का अधिकार १९६० के सिंधु जल समझौते के अनुसार, पूर्वी नदियों (सतलुज, व्यास और रावी) के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है। अब तक बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यह पानी बहकर पाकिस्तान चला जाता था, जिसे अब भारत अपने सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल करेगा। २०২৬ तक इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से भारत की ३७,००० हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।

पाकिस्तान पर पड़ने वाला असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर टिकी है, जो सिंधु नदी तंत्र पर निर्भर है। पानी की कमी से लाहौर और मुल्तान जैसे शहरों में अनाज का संकट पैदा हो सकता है। पाकिस्तान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाते हुए भारत पर ‘जल को हथियार’ बनाने का आरोप लगाया है, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है।

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