‘ममता के बजट से हम दबाव में हैं!’ सीपीआईएम की बैठक में नेताओं ने मानी हार? बंगाल में सियासी भूकंप

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वामपंथी खेमे में खलबली मच गई है। गुरुवार को कोलकाता में शुरू हुई सीपीआईएम की दो दिवसीय राज्य समिति की बैठक में पार्टी नेताओं ने एक कड़वा सच स्वीकार किया है। बैठक में कई जिला प्रतिनिधियों ने माना कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लक्ष्मी भंडार की राशि बढ़ाने और नई ‘युवा साथी’ योजना (बेरोजगारों को 1500 रुपये महीना) शुरू करने से पार्टी भारी दबाव में है।
नेताओं का कहना है कि इन योजनाओं ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है, जिससे चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ी बढ़त मिल सकती है। बैठक में चर्चा हुई कि युवा साथी के फॉर्म भरने के लिए लगी लंबी कतारें वामपंथियों के लिए खतरे की घंटी हैं। इस बीच, युवा नेता प्रतीक उर रहमान के इस्तीफे ने आग में घी डालने का काम किया है। हालांकि, मोहम्मद सलीम ने इस पर चुप्पी साध रखी है और शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब देने की बात कही है।
संगठनात्मक स्तर पर, सीपीआईएम ने दावा किया है कि 80 प्रतिशत सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय हो चुके हैं। बाकी 20 प्रतिशत सीटों पर सहयोगियों के साथ बातचीत चल रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी की कल्याणकारी योजनाओं और पार्टी के भीतर मचे आंतरिक कलह के बीच वामपंथी मोर्चा खुद को बचा पाएगा?