भारत बनेगा ३० ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी? AI बढ़ाएगा रफ्तार, लेकिन रोजगार के मोर्चे पर बड़ी चुनौती!

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘सुनामी’ बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने चेतावनी दी है कि AI दुनिया भर में लगभग ४०% नौकरियों को प्रभावित करेगा। उनका कहना है कि यह तकनीक अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, लेकिन इसके साथ ही रोजगार के बाजार में भारी उथल-पुथल भी मच सकती है।

IMF की रिपोर्ट और भारत का लक्ष्य: जॉर्जीवा के अनुसार, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में ६०% तक नौकरियां AI के प्रभाव में आ सकती हैं। हालांकि, उन्होंने भारत के लिए सकारात्मक संकेत भी दिए हैं। २०४७ तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य और ३० ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के सपने को साकार करने में AI एक बड़ी भूमिका निभा सकता है। IMF के शोध के अनुसार, AI वैश्विक विकास दर में ०.८% की अतिरिक्त वृद्धि कर सकता है।

नंदन नीलेकणी का नजरिया: इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणी का मानना है कि AI के आने से काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। कोडिंग जैसे पारंपरिक कार्यों के बजाय अब AI सिस्टम को मैनेज करने पर जोर होगा। नीलेकणी ने भविष्यवाणी की है कि AI वैश्विक स्तर पर १७ करोड़ नई उच्च-विकास वाली नौकरियां पैदा करेगा। यह तकनीक केवल एक नया स्तर नहीं है, बल्कि व्यापार चलाने के मूल सिद्धांतों में बदलाव है।

काम के ढांचे में बदलाव: माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के अध्यक्ष पुनीत चंडोक ने भी कहा कि AI नौकरियों को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, बल्कि उन्हें छोटे-छोटे कार्यों (Tasks) में विभाजित कर देगा। पुरानी कार्यप्रणालियां अब काम नहीं आएंगी और कर्मचारियों को नई तकनीक के साथ तालमेल बिठाना होगा। कुल मिलाकर, भविष्य उन्हीं का है जो AI के साथ मिलकर काम करना सीखेंगे।

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