किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मौत को मात देकर बनी मां! कोलकाता के डॉक्टरों ने कर दिखाया असंभव चमत्कार

चिकित्सा जगत में एक बार फिर कोलकाता ने इतिहास रचा है। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद एक महिला का सुरक्षित रूप से बच्चे को जन्म देना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। वर्धमान की रहने वाली 30 वर्षीय माधवी लता कुंडू ने तमाम शारीरिक बाधाओं और गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के बावजूद एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया है।

खतरों से भरा सफर: माधवी का साल 2020 में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। जब वह गर्भवती हुईं, तो उनके सामने कई चुनौतियां थीं—उच्च रक्तचाप, थायराइड और इम्यूनो-सप्रेसेंट दवाओं का असर। गर्भावस्था के 21वें हफ्ते में उनकी किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगी और शरीर में संक्रमण फैल गया। डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मां की पुरानी किडनी को बचाते हुए बच्चे को सुरक्षित दुनिया में लाना था।

डॉक्टरों की सूझबूझ: नेफ्रोलॉजी और गायनोकोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने मिलकर एक विशेष रणनीति बनाई। जब 28वें हफ्ते में गर्भ में पानी कम होने लगा और बच्चे का विकास रुक गया, तो डॉक्टरों ने 30वें हफ्ते में ही सिजेरियन ऑपरेशन करने का फैसला लिया। 1.6 किलो की बच्ची के जन्म के बाद उसे 20 दिनों तक एनआईसीयू (NICU) में रखा गया।

जीती जिंदगी की जंग: डॉ. शिल्पिता बनर्जी और डॉ. उपल सेनगुप्ता के नेतृत्व में सफल इलाज के बाद अब मां और बच्ची दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। माधवी कहती हैं, “एक समय मुझे लगा कि मैं अपनी बच्ची या अपनी किडनी खो दूंगी, लेकिन डॉक्टरों ने मुझे हारने नहीं दिया। आज अपनी बेटी को गोद में लेना किसी वरदान जैसा है।” डॉक्टरों के अनुसार, किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों में ऐसी सफलता सही समय पर लिए गए फैसलों और सटीक निगरानी का परिणाम है।

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