२०२९ तक का समय मांगा: क्या फिर से ‘पिछड़ा देश’ बना रहना चाहता है बांग्लादेश?

बांग्लादेश की नई सरकार ने कार्यभार संभालते ही देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से अनुरोध किया है कि बांग्लादेश को ‘कम विकसित देशों’ (LDC) की श्रेणी से बाहर निकालने की समय सीमा को तीन साल और बढ़ाकर २०२९ तक कर दिया जाए। आर्थिक संबंध विभाग (ERD) के सचिव शहरयार कादिर सिद्दीकी ने इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र की विकास नीति समिति (CDP) को पत्र भेजा है।

मुख्य कारण: सरकार का तर्क है कि देश वर्तमान में कई आंतरिक और बाहरी संकटों से जूझ रहा है। कोरोना महामारी का असर, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बढ़ती कीमतें, और हालिया राजनीतिक उथल-पुथल ने देश की आर्थिक स्थिति को नाजुक बना दिया है। वाणिज्य मंत्री खंदकार अब्दुल मुक्तदीर ने कहा कि बांग्लादेश का निर्यात ८५% केवल तैयार कपड़ों (Garments) पर निर्भर है। यदि अभी एलडीसी का दर्जा छिन जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिलने वाली शुल्क मुक्त सुविधाएं समाप्त हो जाएंगी, जिससे देश को सालाना अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है।

उद्योग जगत की चिंता: व्यापारिक संगठनों (BGMEA और FBCCI) का मानना है कि एलडीसी दर्जे के हटने से न केवल निर्यात कम होगा, बल्कि दवा उद्योग पर भी बुरा असर पड़ेगा। वर्तमान में बौद्धिक संपदा कानूनों में छूट के कारण बांग्लादेश सस्ती दवाएं बना पा रहा है, लेकिन दर्जा बदलने के बाद रयल्टी के कारण दवाओं की कीमतें आसमान छू सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत और चीन जैसे मित्र राष्ट्रों का समर्थन मिले, तो संयुक्त राष्ट्र महासभा में समय बढ़ाने का प्रस्ताव पारित हो सकता है। सोलोमन द्वीप और नेपाल जैसे देशों को पहले भी ऐसी राहत मिल चुकी है।

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