सिंधु जल संधि स्थगित होते ही बड़ा एक्शन! चिनाब नदी में पहली बार ड्रेजिंग, सलाल पावर स्टेशन को मिला जीवनदान

सिंधु जल संधि के स्थगित होने के बाद भारत ने हिमालयी नदियों के प्रबंधन में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। जम्मू-कश्मीर की चिनाब नदी में पहली बार ड্রেজিং (गाद हटाना) का काम शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य रियासी जिले में स्थित सलाल जलविद्युत केंद्र की कार्यक्षमता को फिर से बहाल करना है। गाद जमने के कारण इस जलाशय की क्षमता २८४ MCM से घटकर मात्र ९.९१ MCM रह गई थी।

क्यों रुका था काम? १९६० और १९७८ की संधियों के कड़े नियमों के कारण भारत को जलाशय की गाद साफ करने या ड्रेजिंग करने की अनुमति नहीं थी। अब संधि स्थगित होने के बाद, प्रशासन ने उन ६ ‘अंडर-स्लुइस’ गेटों को फिर से खोलने के लिए टेंडर जारी कर दिया है जिन्हें दशकों पहले स्थायी रूप से सील कर दिया गया था।

बिजली संकट होगा दूर: अधिकारियों के अनुसार, अब तक १.७ लाख मीट्रिक टन गाद निकाली जा चुकी है। इससे न केवल टरबाइन और मशीनरी खराब होने से बचेगी, बल्कि बिजली उत्पादन में भी भारी वृद्धि होगी। जनवरी २०२६ तक जलाशय की क्षमता बढ़कर १४ MCM हो चुकी है। यह कदम जम्मू-कश्मीर की ऊर्जा सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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