ईस्ट कोलकाता वेटलैंड मामला: अब केंद्र और गृह मंत्रालय को पक्ष बनाने का निर्देश, १६ मार्च को अगली सुनवाई

पूर्वी कोलकाता की आर्द्रभूमि (Wetlands) को बचाने और वहां बने अवैध निर्माणों को हटाने के मामले में राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर कोलकाता हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। सोमवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने दो टूक शब्दों में कहा, “अगर राज्य सरकार कार्रवाई करने में अक्षम है, तो हमें अवैध निर्माणों को हटाने के लिए अर्धसैनिक बलों (Central Forces) को बुलाना होगा।”

ईस्ट कोलकाता वेटलैंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (EKWMA) ने अदालत को बताया कि वे ५०५ अवैध ढांचों को गिराने में असमर्थ हैं क्योंकि उन्हें कोलकाता नगर निगम और जिला मजिस्ट्रेट से कोई सहायता नहीं मिल रही है। वकील ने दावा किया कि बिजली काटने की कोशिश करने पर विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ता है और स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है।

जस्टिस सिन्हा ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जमीन पर कोई वास्तविक काम नहीं हो रहा है, सिर्फ कागजों पर रिपोर्ट दी जा रही है। उन्होंने अब केंद्र सरकार, केंद्रीय गृह मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय को इस मामले में पक्ष (Party) बनाने का आदेश दिया है। अदालत के इस रुख से साफ है कि आर्द्रभूमि बचाने के लिए अब बड़े सैन्य हस्तक्षेप की संभावना बढ़ गई है।

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