मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनेगा Su-57? वायुसेना की ताकत में होगा ऐतिहासिक इजाफा
February 25, 2026

भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी मारक क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान सुखोई Su-57 (Sukhoi Su-57) को अपने बेड़े में शामिल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, भारत ऐसे 40 जेट खरीदने की योजना बना रहा है। यह विमान न केवल युद्ध में माहिर है, बल्कि अपनी ‘स्टील्थ’ तकनीक के कारण दुश्मन के रडार की नजरों से ओझल रहने में भी सक्षम है।
Su-57 की खासियतें जो इसे बनाती हैं ‘सुपरफाइटर’:
- राडार से बचने की क्षमता: विशेष डिजाइन और राडार-अवशोषक सामग्री के कारण दुश्मन इसे आसानी से ट्रैक नहीं कर पाता।
- किन्जल मिसाइल: यह आवाज से 10 गुना तेज चलने वाली ‘किन्जल’ हाइपरसोनिक मिसाइल ले जाने में सक्षम है।
- बेहतरीन फुर्ती: यह आसमान में बहुत तीखे मोड़ ले सकता है, जिससे ‘डॉगफाइट’ (हवाई जंग) में यह अपराजेय हो जाता है।
- ऊंचाई और रेंज: 20 हजार मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरने वाला यह विमान हिमालय जैसे दुर्गम क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त है।
भारत के लिए क्यों है जरूरी? भारत का अपना स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का विमान AMCA 2035 से पहले तैयार नहीं होगा। ऐसे में चीन के J-20 और अमेरिका के F-35 का मुकाबला करने के लिए भारत को Su-57 की तत्काल आवश्यकता है। रूस ने इसे भारत में ही बनाने (Local Production) का प्रस्ताव दिया है, जिससे भारत की रक्षा निर्यात क्षमता भी बढ़ेगी।