32,000 शिक्षकों की नौकरी पर फिर मंडराया खतरा! कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

पश्चिम बंगाल में 2014 की प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के आधार पर नियुक्त 32,000 शिक्षकों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा इन शिक्षकों की नौकरी बहाल रखने के फैसले के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भारी भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के बावजूद हाईकोर्ट ने केवल ‘मानवीय आधार’ पर इन अवैध नियुक्तियों को बरकरार रखा है, जो मेधावी छात्रों के साथ अन्याय है।

बता दें कि इससे पहले पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय ने इंटरव्यू और एप्टीट्यूड टेस्ट में गड़बड़ी के आरोप में इन 32,000 अप्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने का आदेश दिया था। हालांकि, दिसंबर में जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस ऋतब्रत मित्रा की डिवीजन बेंच ने इस आदेश को पलट दिया था। डिवीजन बेंच का कहना था कि जांच पूरी होने से पहले इस तरह सामूहिक छंटनी नहीं की जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में ‘कैविएट’ दाखिल कर दी है। इसका मतलब है कि बोर्ड का पक्ष सुने बिना अदालत कोई भी एकतरफा स्थगन आदेश (Stay Order) जारी नहीं कर पाएगी। पूरे बंगाल की नजरें अब दिल्ली पर टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला हजारों परिवारों के भविष्य और शिक्षा विभाग की साख से जुड़ा है।

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