अदालतें खाली, जज साहब संभाल रहे वोटर लिस्ट! न्याय की आस में भटक रहे हजारों लोग

पश्चिम बंगाल की जिला अदालतों में इन दिनों सन्नाटा पसरा है और न्याय की गुहार लगाने आए लोगों के चेहरे पर निराशा है। वजह है—वोटर लिस्ट संशोधन का विशेष अभियान (SIR)। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, जिला न्यायाधीशों को अब मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कागजी कार्यवाही और फाइलों की जांच में जुटना पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप, हुगली के चुंचुड़ा से लेकर पूर्व वर्धमान और उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी तक न्यायिक कार्य पूरी तरह चरमरा गया है।

पूर्व वर्धमान जिले में स्थिति सबसे गंभीर है, जहाँ लगभग 5 लाख मतदाताओं को सुनवाई के लिए नोटिस भेजा गया है। जिला जज के साथ 5 अतिरिक्त जिला जज और 3 अन्य वरिष्ठ जज दस्तावेजों के सत्यापन में व्यस्त हैं। प्रत्येक जज को 2 से 3 विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दूर-दराज के इलाकों से आए मुवक्किलों को बिना सुनवाई के वापस लौटना पड़ रहा है। रायना की एक महिला याचिकाकर्ता ने बताया, “मैं तीन दिनों से आ रही हूँ, लेकिन जज साहब नहीं हैं। हमारी सुनवाई कब होगी, कोई नहीं जानता।”

यही हाल हुगली के चुंचुड़ा कोर्ट का भी है, जहाँ न्यायाधीशों की अनुपस्थिति के कारण अधिकांश कोर्ट रूम में काम बंद है। जलपाईगुड़ी में तो जिला जज सर्किट हाउस में कैंप लगाकर फाइलों की जांच कर रहे हैं। वकीलों का कहना है कि पहले से ही जजों की कमी है, और अब SIR के काम ने आम आदमी की परेशानियों को दोगुना कर दिया है। वर्धमान बार एसोसिएशन ने भी इस पर चिंता जताई है कि अदालती कार्यवाही ठप होने से लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या वोटर लिस्ट की शुद्धता के चक्कर में न्याय मिलने में देरी जायज है?


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