BLO का अपना ही नाम ‘विचाराधीन’! २८ साल की नौकरी और पासपोर्ट के बावजूद वोटर लिस्ट में फंसी साख

पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर (SIR) की फाइनल लिस्ट ने कई सरकारी अधिकारियों को भी मुश्किल में डाल दिया है। नंदीग्राम में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) का अपना नाम ही मतदाता सूची की ‘अमीमांसित’ या ‘Under Adjudication’ श्रेणी में डाल दिया गया है।

बीएलओ का फूटा गुस्सा: नंदीग्राम के बूथ नंबर ६६ के बीएलओ शेख जाकिर हुसैन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि वह पिछले २८ साल से सरकारी सेवा में हैं। उनके पास खुद का और उनके पूरे परिवार का पासपोर्ट है, जो नागरिकता का एक मजबूत दस्तावेज माना जाता है। हुसैन ने कहा, “सब कुछ सही होने के बाद भी मेरा नाम क्यों पेंडिंग रखा गया है? यह समझ से परे है।”

बसीरहाट में भी ‘अजीब’ स्थिति: ऐसा ही एक मामला बसीरहाट में भी देखने को मिला है। वहाँ के बीएलओ अख्तर रसूल के परिवार के सभी सदस्यों के नाम अधर में लटके हैं। उनके परिवार में एक राज्य पुलिस में कार्यरत है और दूसरा मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर है। इसके बावजूद आयोग ने उनके नाम को ‘एडज्यूडिकेशन’ लिस्ट में रखा है।

आयोग के अनुसार, जिन ६० लाख लोगों के नाम इस श्रेणी में हैं, उनके दस्तावेजों की न्यायिक जांच चल रही है। यदि जांच में दस्तावेज सही पाए जाते हैं, तो उनके नाम पूरक सूची के माध्यम से शामिल किए जाएंगे।

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