चुनाव से पहले ५०% डीए का धमाका? सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नबान्न की बढ़ी मुश्किलें, कर्मचारी नेता का बड़ा दावा

पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (DA) के मामले में सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है। २००८ से २०१९ तक के बकाया डीए को लेकर शीर्ष अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सरकार को यह राशि हर हाल में लौटानी होगी। इस बीच, ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉइज’ के महासचिव मलय मुखर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर सरकार पर तीखा हमला बोला है।

मुखर्जी का कहना है कि राज्य सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया था कि वे २५% राशि जमा करने के लिए तैयार हैं, जिससे साबित होता है कि खजाने में पैसा है। लेकिन अब तक भुगतान न होने के कारण संगठन ने अदालत की अवमानना (Contempt of Court) का मामला दर्ज कराया है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से पहले सरकार को कम से कम ५०% डीए देना ही होगा, अन्यथा उन्हें सत्ता से हाथ धोना पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, ३१ मार्च तक बकाया डीए का २५ प्रतिशत हिस्सा चुकाना अनिवार्य है, जिसकी पहली किस्त ६ मार्च तक दी जानी चाहिए। शेष ७५ प्रतिशत के भुगतान के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया है। राज्य सरकार को १५ अप्रैल तक अपनी प्रगति रिपोर्ट (Compliance Report) पेश करनी है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बार कानूनी दबाव के आगे सरकार को झुकना ही पड़ेगा।

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