इजरायल पर बरसी मौत! १८० मासूमों की जान का बदला लेने को तेहरान ने मचाया कोहराम, कांप उठा अमेरिका

मध्य पूर्व में युद्ध की ज्वाला अब नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद तेहरान ने वह कर दिखाया है जिसकी आशंका पूरी दुनिया को थी। १ मार्च, २०२६ की रात इजरायल के लिए काली रात साबित हुई। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों का जवाब देते हुए ईरान ने तेल अवीव और यरुशलम पर मिसाइलों की ऐसी बारिश की कि पूरा शहर श्मशान जैसा दिखने लगा है।

ईरान के इस भीषण हमले में तेल अवीव के गुश दान इलाके की गगनचुंबी इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। इजरायल का अत्याधुनिक रक्षा कवच भी ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा। यरुशलम के रिहायशी इलाकों में हुए धमाकों ने राष्ट्रपति आइजैक हर्ज़ोग को भी हिला कर रख दिया है। वे खुद प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे, जहां चारों तरफ सिर्फ मलबा और धुआं नजर आ रहा था। ईरान का यह हमला महज सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि उस खून का बदला है जो रविवार को ईरान के मिनाब शहर में बहा था।

बता दें कि पिछले रविवार को इजरायल-अमेरिकी सेना की एक मिसाइल ईरान के मिनाब स्थित एक स्कूल पर गिरी थी, जिसमें १८० मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। इस नरसंहार के बाद ईरान ने ‘महायुद्ध’ का बिगुल फूंक दिया। सोमवार को ईरान ने इजरायल के साथ-साथ मध्य पूर्व के चार अन्य देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी ड्रोन और मिसाइल हमले किए। कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी बेस अब ईरान के निशाने पर हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध के लंबा खिंचने के संकेत दिए हैं। ट्रंप के अनुसार, यह जंग अगले ५ हफ्तों तक चल सकती है, जबकि पहले उन्होंने इसके ४ हफ्तों में खत्म होने की भविष्यवाणी की थी। दुबई जैसे शहरों में भी लोग रात भर ड्रोन और मिसाइलों की गूंज के कारण सो नहीं पा रहे हैं। खाड़ी देशों में दहशत का माहौल है और ईरान के तेवर बता रहे हैं कि वह अब रुकने वाला नहीं है।

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