मध्य पूर्व में युद्ध का साया: 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को लेकर पीएम मोदी ने संभाली कमान, खाड़ी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से की बात

मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 48 घंटों के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान, जॉर्डन और बहरीन सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात की है। प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र में बिगड़ते सैन्य हालात का विस्तृत जायजा लिया और स्पष्ट किया कि भारत इस अशांति को लेकर बेहद गंभीर है। विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में एक लिखित बयान जारी कर सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

विदेश मंत्रालय के सात मुख्य बिंदु भारत सरकार ने सात महत्वपूर्ण बिंदुओं के माध्यम से अपनी चिंताएं साझा की हैं। मंत्रालय के अनुसार, फरवरी के अंत में शुरू हुआ यह संघर्ष अब व्यापक रूप ले रहा है, जिसमें कई देश शामिल होते जा रहे हैं। मौतों का बढ़ता आंकड़ा और पवित्र रमजान महीने के दौरान ऐसी हिंसा को भारत ने ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया है। भारत का मानना है कि इस विवाद को केवल कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए।

1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि विदेश मंत्री एस जयशंकर के नेतृत्व में मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी देशों में रह रहे लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा दिल्ली के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय है। बयान में कहा गया है कि भारतीयों की सुरक्षा को लेकर कोई भी खतरा भारत के लिए स्वीकार्य नहीं होगा। हाल ही में कुछ भारतीयों की जान जाने और कुछ के लापता होने की खबरों ने भारत की चिंता को और बढ़ा दिया है।

आर्थिक और व्यापारिक संकट मध्य पूर्व का यह संकट केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा खतरा है। व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों ने समुद्री मार्ग को असुरक्षित बना दिया है। चूंकि भारत का एक बड़ा कार्यबल वैश्विक स्तर पर सक्रिय है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर भारत की आपूर्ति श्रृंखला और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

दूतावासों को हाई-अलर्ट पर रहने का निर्देश प्रधानमंत्री मोदी ने संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को भरोसा दिलाया है कि सरकार उनके साथ है। सभी संबंधित देशों में स्थित भारतीय दूतावासों को सक्रिय कर दिया गया है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत दूতাवास से संपर्क करें। भारत सरकार लगातार अरब देशों के प्रशासन के साथ संपर्क में है और स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही है ताकि हर भारतीय नागरिक सुरक्षित घर लौट सके।

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