18 मार्च को है रंगों का त्योहार! शांतिनिकेतन का बसंत उत्सव या पंजाब का होला मोहल्ला, कहां जाएंगे आप?

भारत विविधताओं का देश है और यहां का हर त्योहार अपनी एक अलग कहानी कहता है। रंगों का महापर्व ‘होली’ इस साल 18 मार्च को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक यह त्योहार भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। कहीं लाठियों की गूंज है तो कहीं फूलों की खुशबू, आइए जानते हैं भारत की कुछ अनोखी होली परंपराओं के बारे में।

ब्रज की लठमार और वृंदावन की फूलों वाली होली: भगवान कृष्ण की जन्मभूमि ब्रज में होली का अनुभव अलौकिक होता है। बरसाना और नंदगांव की ‘लठमार होली’ पूरी दुनिया में मशहूर है, जहां महिलाएं लाठियों से पुरुषों पर प्रहार करती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं। वहीं, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में ‘फूलों वाली होली’ खेली जाती है, जहां रंगों की जगह ताजे फूलों की पंखुड़ियों की बारिश की जाती है।

पश्चिम बंगाल की डोल यात्रा और बसंत उत्सव: बंगाल में होली को ‘डोल जात्रा’ के रूप में मनाया जाता है। शांतिनिकेतन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा शुरू किया गया ‘बसंत उत्सव’ पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र होता है। यहां लोग पीले वस्त्र पहनकर नृत्य और संगीत के साथ अबीर-गुलाल खेलते हैं। यह उत्सव सांस्कृतिक विरासत का एक सुंदर संगम है।

राजस्थान की रॉयल होली और गोवा का शिग्मो: राजस्थान के उदयपुर और जयपुर में होली शाही अंदाज में मनाई जाती है। पूर्व राजपरिवारों के महलों में होलिका दहन और भव्य जुलूस निकाले जाते हैं। वहीं गोवा में इसे ‘शिग्मो’ (Shigmo) कहा जाता है। गोवा के लोग रंगीन कपड़े पहनकर और पारंपरिक लोक नृत्य के जरिए वसंत का स्वागत करते हैं।

पंजाब का होला मोहल्ला: पंजाब में होली को वीरता के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। सिख समुदाय ‘होला मोहल्ला’ के रूप में मार्शल आर्ट्स, कुश्ती और शस्त्र संचालन का प्रदर्शन करता है। इसके बाद सामूहिक लंगर और रंगों की होली खेली जाती है। १८ मार्च की यह होली भारत की इसी एकता और विविधता को दर्शाती है।

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