ईरान-इज़राइल युद्ध की मार: भारत के ऊर्जा भंडार पर खतरा, विदेश मंत्रालय ने जारी किए इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से भारत के सामने ईंधन का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नई दिल्ली में २४ घंटे का कंट्रोल रूम स्थापित किया है। यह कंट्रोल रूम न केवल देश में कच्चे तेल की आपूर्ति की निगरानी करेगा, बल्कि संकट की स्थिति में वैकल्पिक मार्गों की भी तलाश करेगा। मंगलवार को आई एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास अब केवल २५ दिनों का कच्चा और रिफाइंड तेल बचा है, जो एक हफ्ते पहले तक ७४ दिनों का था।

विदेश मंत्रालय ने भारतीयों की सुरक्षा के लिए भी विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। बहरीन, ईरान, इराक, इजरायल और यूएई जैसे देशों में फंसे भारतीय इन नंबरों (1800118797, 91-11-23012113, 91-11-23014104, 91-11-23017905) पर संपर्क कर सकते हैं।

भारत के लिए चिंता की बात यह है कि सऊदी अरब की एलपीजी पाइपलाइन पर हमले हुए हैं और कतर ने एलएनजी उत्पादन रोक दिया है। ऐसे में रूस ने भारत को तेल की कमी न होने देने का आश्वासन दिया है। हालांकि, यहाँ पेंच यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूसी तेल आयात को लेकर टैरिफ की धमकी दी है। अब मोदी सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह ट्रम्प की धमकियों और देश की ऊर्जा सुरक्षा के बीच कैसे संतुलन बनाती है। आने वाले दिनों में अगर युद्ध नहीं थमा, तो भारत को अमेरिका और नॉर्वे से एलएनजी आयात बढ़ाना पड़ सकता है, जो काफी महंगा साबित हो सकता है।

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