पश्चिम एशिया युद्ध की मार! भोपाल के नवाबी इत्र बाजार में पसरा सन्नाटा, करोड़ों का नुकसान!

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक अस्थिरता ने भोपाल के विश्व प्रसिद्ध इत्र (सुगंध) उद्योग की कमर तोड़ दी है। नवाबी दौर की विरासत समेटे इस बाजार में आज सन्नाटा है। व्यापारियों का कहना है कि खाड़ी देशों में जारी तनाव के कारण करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है, जिससे पीढ़ियों से चला आ रहा यह धंधा संकट में है।

बाजार का समीकरण और घाटा: भोपाल के जुमेराती, इब्राहिमपुरा और जहांगीराबाद जैसे इलाकों में इत्र का बड़ा कारोबार होता है। आमतौर पर रमजान के दौरान यहाँ २० से २५ करोड़ रुपये की बिक्री होती है। लेकिन इस साल कूरियर सेवाएं ठप होने और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बाधा के कारण खाड़ी देशों से आने वाले १०० से अधिक निर्यात ऑर्डर रद्द कर दिए गए हैं।

कारीगरों पर संकट: इत्र व्यवसायी सैयद मोहम्मद अल्तमस जलाल ने बताया कि प्राकृतिक ‘ऊद’ (Oudh) जैसे महंगे इत्र, जिनकी कीमत २० हजार रुपये प्रति तोला तक होती है, उनका निर्यात पूरी तरह रुक गया है। इससे न केवल बड़े दुकानदार, बल्कि कांच की बोतल बनाने वाले, इत्र मिलाने वाले कारीगर और छोटे कारखाने भी भुखमरी की कगार पर हैं।

ऐतिहासिक मंदी: १०० साल पुरानी संस्था ‘वीनस परफ्यूम्स’ के मालिक रफीक अहमद राजा ने कहा, “हमने अपने जीवन में ऐसी मंदी कभी नहीं देखी। कच्चा माल विदेश से नहीं आ पा रहा है और तैयार माल बाहर भेजा नहीं जा सकता।” व्यापारियों को डर है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो भोपाल की यह पारंपरिक विरासत हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।

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