स्वास्थ्य सचिव के द्वार पहुंचे डॉक्टर्स, क्या एक और बड़े घोटाले की ओर बढ़ रहा है बंगाल?

पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले की गूँज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की नियुक्ति और पोस्टिंग को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगने शुरू हो गए हैं। राज्य में हाल ही में नियुक्त किए गए सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल अधिकारियों की पोस्टिंग में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए ‘सर्विस डॉक्टर्स फोरम’ ने स्वास्थ्य सचिव का दरवाजा खटखटाया है।

दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में १२०० मेडिकल ऑफिसर और ९३० सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की नियुक्ति की है। जैसे ही इनकी पोस्टिंग की सूची जारी हुई, चिकित्सा जगत में विवाद खड़ा हो गया। सर्विस डॉक्टर्स फोरम का आरोप है कि इस बार काउंसलिंग की प्रक्रिया को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) के नियमों के अनुसार, सीनियर रेजिडेंट्स को नियुक्ति के बाद कम से कम एक साल जिला अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में सेवा देनी होती है, जिसके बाद ही उन्हें ब्लॉक या सब-डिवीजनल अस्पतालों में भेजा जा सकता है।

आरोप है कि विभाग ने इन नियमों को ताक पर रखकर अपनी मर्जी से डॉक्टरों को ब्लॉक स्तर के अस्पतालों में तैनात कर दिया है। संगठन के राज्य सचिव सजल विश्वास ने कहा कि काउंसलिंग न कराना पारदर्शी व्यवस्था पर प्रहार है और इसमें भाई-भतीजावाद की बू आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस अनियमितता को तुरंत नहीं सुधारा गया, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। इस मामले ने ममता सरकार की स्वास्थ्य नीति पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया है।

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