चुनाव से पहले बंगाल में बड़ा खेल! राज्यपाल बोस का इस्तीफा और आर एन रवि की नियुक्ति पर भड़की TMC

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ऐन पहले राज्यपाल सी वी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे और तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि को बंगाल की कमान सौंपे जाने ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस कदम को केंद्र सरकार की एक ‘गहरी साजिश’ करार दिया है। राज्य सरकार की दो वरिष्ठ मंत्रियों, शशि पांजा और चंद्रिमा भट्टाचार्य, और राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने संयुक्त रूप से केंद्र के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अंधेरे में रखकर लिया गया यह फैसला संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।
राष्ट्रपति शासन की आहट? शशि पांजा का तीखा सवाल: राज्य की मंत्री शशि पांजा ने इस मुद्दे पर सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही मांगी है। उन्होंने संदेह जताया कि क्या चुनाव से पहले बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की जमीन तैयार की जा रही है? पांजा ने पूछा, “आखिर चुनाव की दहलीज पर बोस को इस्तीफा क्यों देना पड़ा? क्या आर एन रवि को इसलिए लाया गया है ताकि वे केंद्र के एजेंडे को आगे बढ़ा सकें?” वहीं, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने इसे बीजेपी का ‘गंदा राजनीतिक खेल’ बताते हुए कहा कि यह बंगाल के लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश है।
संवैधानिक ढांचे पर हमला, सागरिका घोष ने केंद्र को कोसा: TMC की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने इस घटना को भारत के ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) पर करारा प्रहार बताया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी शासित केंद्र सरकार राजभवन को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। सागरिका के अनुसार, निर्वाचित राज्य सरकार से बिना परामर्श किए नया राज्यपाल थोपना लोकतांत्रिक मानदंडों के खिलाफ है। गौरतलब है कि आर एन रवि का तमिलनाडु में स्टालिन सरकार के साथ टकराव का इतिहास रहा है, ऐसे में बंगाल में उनकी नियुक्ति ने राज्य प्रशासन और राजभवन के बीच भविष्य में होने वाले बड़े टकराव के संकेत दे दिए हैं।