भारतीय कूटनीति की बड़ी जीत: रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका ने दी हरी झंडी!

वैश्विक राजनीति के मंच पर भारत की विदेश नीति ने एक बार फिर अपना लोहा मनवाया है। ईरान-इजरायल युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदने का रास्ता साफ कर दिया है। अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए भारत को ३० दिनों की विशेष छूट (Waiver) देने का ऐलान किया है।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि यह एक अस्थायी उपाय है। इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार में ईरान के प्रभाव को कम करना और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखना है। इस घोषणा का असर बाजार पर तुरंत दिखा, जहां ब्रेंट क्रूड की कीमतें १.५२% गिरकर $८४.२१ प्रति बैरल पर आ गईं।

अमेरिका के इस फैसले के पीछे के मुख्य कारण:

  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव: युद्ध के कारण इस प्रमुख समुद्री मार्ग से तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। जहां पहले रोजाना ६० टैंकर गुजरते थे, वहीं १ मार्च को यह संख्या घटकर केवल ५ रह गई।
  • फंसा हुआ स्टॉक: यह छूट केवल उन रूसी तेल कार्गो के लिए है जो ५ मार्च २०२६ तक जहाजों पर लोड हो चुके थे और वर्तमान में समुद्र में अटके हुए हैं।
  • भारत का रुख: भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग ९०% आयात करता है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने साफ कर दिया है कि भारत अपने “राष्ट्रीय हित” को सर्वोपरि रखते हुए विभिन्न देशों से तेल की खरीद जारी रखेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से सस्ता तेल मिलने से भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जुलाई २०२४ में भारत रूस से प्रतिदिन २ मिलियन बैरल तेल आयात कर रहा था, जो फरवरी में गिरकर १.०४ मिलियन बैरल रह गया था। अब इस विशेष छूट के बाद उम्मीद है कि आयात में फिर से बड़ी बढ़ोतरी होगी, जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें स्थिर हो सकती हैं।

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