बंगाल में राज्यपाल का फेरबदल! क्या राष्ट्रपति शासन की तैयारी? टीएमसी ने उठाए तीखे सवाल

पश्चिम बंगाल में राज्यपाल के अचानक फेरबदल ने एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। सी.वी. आनंद बोस के इस्तीफे के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। टीएमसी का सीधा आरोप है कि मोदी सरकार राजभवनों को भाजपा के ‘वॉर रूम’ की तरह इस्तेमाल कर रही है और संवैधानिक मर्यादाओं की धज्जियां उड़ा रही है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस नियुक्ति के बारे में राज्य सरकार से कोई राय-मशविरा नहीं किया गया। टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर राय और सागरिका घोष ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि यह सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) और पुंछी आयोग की सिफारिशों का खुला उल्लंघन है, जो राज्य सरकार के साथ परामर्श की वकालत करते हैं। आर.एन. रवि का तमिलनाडु में स्टालिन सरकार के साथ लगातार टकराव रहा है, जिसे देखते हुए बंगाल में भी तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले यह कदम राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की किसी गुप्त योजना का हिस्सा हो सकता है। टीएमसी ने इसे लोकतंत्र के ‘बुनियादी व्याकरण’ का उल्लंघन करार दिया है।

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