राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे में प्रोटोकॉल की अनदेखी? गृह मंत्रालय ने ममता सरकार से मांगी रिपोर्ट!

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति के दौरे के दौरान सुरक्षा और प्रोटोकॉल में हुई कथित चूक को लेकर ममता बनर्जी सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्य के मुख्य सचिव को रविवार शाम 5 बजे तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा विवाद? राष्ट्रपति मुर्मू शनिवार को सिलीगुड़ी में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय सांथाल सम्मेलन’ में शामिल होने पहुंची थीं। आरोप है कि राज्य प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल को लेकर काफी टालमटोल की। पहले यह कार्यक्रम विधाननगर में होना था, लेकिन अंतिम समय में इसे चार बार बदला गया और सुरक्षा कारणों का हवाला देकर बागडोगरा के पास गोसाईपुर में अनुमति दी गई।

सभा स्थल पर भीड़ की कमी देख राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंच से ही अपना दर्द साझा किया। उन्होंने कहा, “इतनी कुर्सियां खाली क्यों हैं? ऐसा लग रहा है जैसे लोगों को यहां आने से रोका जा रहा है। कौन नहीं चाहता कि सांथाल समुदाय के लोग शिक्षित हों और एकजुट हों?” कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति खुद उस पुराने स्थल (विधाननगर) पर गईं जहाँ पहले सभा होनी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी अच्छी जगह होने के बावजूद राज्य सरकार ने वहां कार्यक्रम क्यों नहीं होने दिया।

प्रोटोकॉल पर रार: संवैधानिक नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति के आगमन पर मुख्यमंत्री या उनके मंत्रिमंडल के किसी सदस्य का उपस्थित होना अनिवार्य है। लेकिन बागडोगरा हवाई अड्डे पर केवल सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब और प्रशासनिक अधिकारी ही मौजूद थे। राष्ट्रपति ने भी इस पर चुटकी लेते हुए कहा, “ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं, शायद वह नाराज हैं इसलिए खुद नहीं आईं और न ही किसी मंत्री को भेजा।”

पीएम मोदी का हमला और ममता का पलटवार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना को ‘शर्मनाक’ करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि तृणमूल सरकार ने अपनी मर्यादा खो दी है और एक आदिवासी राष्ट्रपति का अपमान किया है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। कोलकाता में धरना मंच से उन्होंने कहा, “बीजेपी राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल राजनीति के लिए कर रही है। जिला प्रशासन ने सभी नियमों का पालन किया है।” ममता ने सोशल मीडिया पर दस्तावेज साझा करते हुए दावा किया कि प्रोटोकॉल के तहत उनका वहां होना जरूरी नहीं था। गृह मंत्रालय की इस सख्ती के बाद अब बंगाल की राजनीति में उबाल आ गया है।

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