शेयर बाजार में हाहाकार! ४ दिनों में विदेशी निवेशकों की २१,००० करोड़ की ‘महासेल’, क्या अब और गिरेगा मार्केट?

पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता ने भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च के पहले सप्ताह के केवल ४ कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार से लगभग २१,০০০ करोड़ रुपये की निकासी की है। गौरतलब है कि फरवरी में इन्हीं निवेशकों ने २२,६१५ करोड़ रुपये का भारी निवेश किया था, लेकिन युद्ध की आहट ने उस बढ़त को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
बाजार टूटने के मुख्य कारण:
- युद्ध का गहराता साया: ईरान और इजरायल के बीच सैन्य संघर्ष ने निवेशकों को डरा दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता की मृत्यु के बाद युद्ध के और भीषण होने की आशंका बढ़ गई है।
- महंगा होता कच्चा तेल: ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत ९२ डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है।
- रुपये की ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ९२ के स्तर को पार कर गया है। रुपया कमजोर होने से विदेशी निवेशकों का मुनाफा कम हो जाता है, जिससे वे पैसा निकालना शुरू कर देते हैं।
- अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे निवेश को छोड़कर सरकारी बॉन्ड की ओर रुख कर रहे हैं।
घरेलू निवेशकों का सहारा: इतनी भारी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और रिटेल निवेशकों का मजबूत सहारा मिला है। म्यूचुअल फंड और एसआईपी (SIP) के बढ़ते प्रवाह ने बाजार को पूरी तरह धराशायी होने से बचा लिया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक युद्ध की स्थिति नहीं सुधरती, विदेशी निवेशकों की वापसी मुश्किल है।