IRIS Dena के 32 बचे हुए सदस्यों पर अमेरिका की नजर! क्या कोलंबो झुकेगा बाइडेन प्रशासन के आगे?

ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को डुबाने के बाद अब उस पर सवार लोगों को लेकर अमेरिका और श्रीलंका के बीच ठन गई है। अमेरिका ने कोलंबो को सख्त चेतावनी दी है कि वे हादसे में बचे हुए किसी भी ईरानी सैनिक या नागरिक को फिलहाल तेहरान को न सौंपें। इस कूटनीतिक रस्साकशी ने श्रीलंका सरकार की नींद उड़ा दी है, जो पहले से ही अपनी अर्थव्यवस्था सुधारने में जुटी है।
वॉशिंगटन का कड़ा रुख अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि IRIS Dena से बचाए गए 32 लोगों और एक अन्य ईरानी जहाज IRIS Booshehr से बचाए गए 208 नागरिकों को ईरान वापस नहीं भेजा जाना चाहिए। अमेरिका चाहता है कि युद्ध की स्थिति सामान्य होने तक इन्हें हिरासत में रखा जाए। श्रीलंका के मंत्री सुनील वाटागाला ने संसद में कहा कि देश एक ऐसी स्थिति से गुजर रहा है जो पहले कभी नहीं देखी गई। अस्पतालों में शवों का ढेर लगा है और कोलंबो इस अंतरराष्ट्रीय विवाद में फंसना नहीं चाहता।
शवों की वापसी पर अड़ा श्रीलंका अमेरिका के दबाव के बावजूद, श्रीलंका ने मानवीय आधार पर मृतकों के शवों को ईरान भेजने की तैयारी कर ली है। श्रीलंकाई मंत्री अरुण जयशेखर ने शनिवार को बताया कि 84 शवों का पोस्टमार्टम पूरा हो चुका है और उन्हें कोल्ड स्टोरेज में रखा गया है। कोलंबो के व्यापारियों ने शवों को सुरक्षित रखने के लिए एक मोबाइल कोल्ड स्टोरेज भी दान किया है। ये शव हवाई मार्ग या समुद्र के रास्ते ईरान भेजे जाएंगे, जिस पर जल्द फैसला होगा।
क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून? श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने कहा है कि वे ‘हेग कन्वेंशन’ के सिद्धांतों का पालन करेंगे, जो एक तटस्थ देश को युद्ध के दौरान योद्धाओं को रोक कर रखने की अनुमति देता है। हालांकि, ‘इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस’ के साथ भी बातचीत जारी है। यदि घायल और बचे हुए लोग खुद ईरान लौटना चाहते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत उन्हें वापस भेजा जा सकता है। फिलहाल, हिंद महासागर में अमेरिका और ईरान के बीच की यह जंग अब कूटनीतिक गलियारों में लड़ी जा रही है।