“६० लाख नाम गायब, कैसे होगा मतदान?” मोहम्मद सलीम ने चुनाव आयोग को घेरा; प्रशासन पर गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल में २०२६ के विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने के लिए सोमवार को चुनाव आयोग की फुल बेंच ने कोलकाता में राजनीतिक दलों के साथ अहम बैठक की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में हुई इस बैठक में बीजेपी, टीएमसी और सीपीआईएम जैसे प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी मांगें रखीं।

सीपीआईएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने बैठक से बाहर निकलकर निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “वोटर लिस्ट से करीब ६० लाख नाम हटाए गए हैं। जब तक इन नामों को बहाल नहीं किया जाता, पारदर्शी चुनाव संभव नहीं है।” सलीम ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने अधिकारियों की लापरवाही की बात स्वीकार की है। उन्होंने ७-८ चरणों के बजाय एक ही चरण में मतदान कराने की वकालत की।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बार सभी को चौंका दिया। २०२१ के विधानसभा चुनाव में कई चरणों में मतदान की मांग करने वाली बीजेपी ने अब १८० डिग्री का यू-टर्न लेते हुए १ या २ चरणों में चुनाव संपन्न कराने की मांग की है। बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने १६ सूत्रीय चार्टर सौंपा, जिसमें संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त सुरक्षा और केंद्रीय बलों के सही इस्तेमाल पर जोर दिया गया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस केंद्रीय बलों को सही ढंग से काम नहीं करने दे रही है।

चुनाव आयोग अब जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक करेगा। माना जा रहा है कि इन बैठकों के बाद ही पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखों और चरणों का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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