इराक में ७०% तक घटा तेल उत्पादन! कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने बढ़ाई भारत सहित एशिया की चिंता

ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें १১৯.৫০ डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचीं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो दुनिया के कुल तेल परिवहन का २० प्रतिशत हिस्सा संभालता है, वहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

युद्ध की वजह से खाड़ी देशों में तेल उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ा है। इराक में तेल उत्पादन में ७० प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो दैनिक ৪৩ लाख बैरल से घटकर महज ১৩ लाख बैरल रह गया है। कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने भी सुरक्षा कारणों से अपने रिफाइनरी ऑपरेशंस कम कर दिए हैं। इजरायल द्वारा तेहरान के तेल डिपो पर किए गए हमलों के बाद सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। यदि तेल की कीमतें ১০০ डॉलर के ऊपर बनी रहती हैं, तो वैश्विक मुद्रास्फीति को रोकना नामुमकिन हो जाएगा।

इस तेल संकट का असर शेयर बाजारों पर भी साफ दिख रहा है। सोमवार को टोक्यो का निक्केई सूचकांक ५.২% गिर गया, जबकि अमेरिकी वायदा बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। ईरान प्रतिदिन १.৬ मिलियन बैरल तेल निर्यात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा चीन जाता है। यदि यह सप्लाई रुकती है, तो चीन अन्य बाजारों का रुख करेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर कीमतें और बढ़ेंगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आपूर्ति पर्याप्त होने का दावा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

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