टीएमसी की ‘गंदी राजनीति’ या आदिवासियों का हक? राष्ट्रपति को चिट्ठी भेजने पर आमने-सामने बीजेपी-टीएमसी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ के लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Revision) का मुद्दा अब राष्ट्रपति भवन की दहलीज तक जा पहुंचा है। सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ने सोमवार को घोषणा की कि वे दार्जिलिंग जिले के लगभग एक लाख उन आदिवासियों की सूची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज रहे हैं, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। यह कदम तब उठाया गया है जब हाल ही में राष्ट्रपति ने बंगाल दौरे पर आदिवासियों की स्थिति पर चिंता जताई थी।

मेयर गौतम देब की मांग: गौतम देब ने आरोप लगाया कि सिलीगुड़ी, माटीगाड़ा और फांसीदेवा जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “चूंकि राष्ट्रपति खुद आदिवासी समुदाय से आती हैं, इसलिए हम उनसे अपील कर रहे हैं कि वे अपनी शक्ति का उपयोग कर इन लोगों को मतदान का अधिकार वापस दिलाएं।” मेयर के अनुसार, ४२ चाय बागानों के सैकड़ों श्रमिकों के नाम अचानक गायब कर दिए गए हैं, जो वर्षों से वहां रह रहे हैं।

बीजेपी का तीखा पलटवार: बीजेपी विधायक शंकर घोष ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि पहले तृणमूल ने राष्ट्रपति का अपमान किया और अब वे उन्हें अपनी ‘गंदी राजनीति’ का हिस्सा बनाना चाहते हैं। घोष के मुताबिक, जिन नामों की जांच चल रही है, वे अभी पूरी तरह से हटे नहीं हैं। बीजेपी का आरोप है कि ममता बनर्जी की पार्टी अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए संवैधानिक पदों का राजनीतिकरण कर रही है।

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