आलू के दाम ने किसानों के आँखों में लाया आंसू, क्या हुगली का गुस्सा बिगाड़ेगा चुनावी समीकरण?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही हुगली के आलू किसानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य के सबसे बड़े आलू उत्पादक जिले हुगली में किसानों का कहना है कि लागत ३५,००० रुपये प्रति बीघा आ रही है, लेकिन उन्हें अपनी फसल की आधी कीमत भी नहीं मिल रही। सरकार द्वारा तय ४७५ रुपये की एमएसपी (MSP) जमीनी स्तर पर गायब है और किसान २००-२२० रुपये प्रति बोरी (५० किलो) आलू बेचने को मजबूर हैं।
चुनावी चोट की चेतावनी हुगली के किसानों ने सीधे तौर पर कहा है कि इस बार के चुनावों में वे अपनी दुर्दशा का बदला लेंगे। किसान शेख नूरुल इस्लाम ने गुस्से में कहा, “हमें यह सरकार नहीं चाहिए। आलू १८० रुपये बिक रहा है, कोई खरीदार नहीं है। सरकार हमें फांसी लगाने के पैसे दे दे।” कई इलाकों में किसानों ने सड़कों पर आलू फेंककर प्रदर्शन किया और क्विंटल के हिसाब से कम से कम १२०० रुपये की मांग की।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस से जुड़े आलू व्यापारी संघ के अध्यक्ष स्वपन सामंत ने इन प्रदर्शनों को राजनीतिक बताया है। उनका कहना है कि सरकार किसानों की मदद कर रही है और जो लोग विरोध कर रहे हैं वे भाजपा के कार्यकर्ता हैं। हालांकि, किसानों का बढ़ता आक्रोश ममता बनर्जी की राह में बड़ी बाधा बन सकता है।