मेडिकल साइंस में बड़ा चमत्कार! जापान ने दी दुनिया की पहली स्टेम-सेल थेरेपी को मंजूरी

दुनिया भर में स्वास्थ्य प्रणालियों पर बढ़ते बोझ के बीच जापान ने एक ऐसी कामयाबी हासिल की है, जो चिकित्सा जगत की दिशा बदल देगी। जापान सरकार ने पार्किंसंस (Parkinson’s) और गंभीर हृदय रोगों के इलाज के लिए दुनिया की पहली ‘इंड्यूस्ड प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल’ (iPS) आधारित थेरेपी को मंजूरी दे दी है। यह ‘रीजेनरेटिव मेडिसिन’ के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी प्रगति मानी जा रही है।
पार्किंसंस के लिए ‘एमचेप्रे’ (Emchepre) थेरेपी जापानी कंपनी ‘सुमितोमो फार्मा’ द्वारा विकसित इस थेरेपी में लैब में तैयार स्टेम सेल्स को सीधे मरीज के मस्तिष्क में प्रत्यारोपित किया जाता है। पार्किंसंस में मस्तिष्क की डोपामाइन बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। यह थेरेपी उन क्षतिग्रस्त न्यूरॉन्स की मरम्मत करती है, जिससे कंपन और चलने-फिरने में होने वाली कठिनाई जैसे लक्षणों में भारी सुधार देखा गया है। क्योटो विश्वविद्यालय के क्लीनिकल ट्रायल में ७१% मरीजों में इसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
दिल के मरीजों के लिए ‘रीहार्ट’ (Reheart) गंभीर हार्ट फेलियर के मरीजों के लिए भी जापान ने ‘रीहार्ट’ नामक थेरेपी को हरी झंडी दिखाई है। यह हृदय की सतह पर नई रक्त वाहिकाओं का निर्माण कर दिल की कार्यक्षमता को बढ़ाती है। हार्ट अटैक के बाद दिल की मांसपेशियों को ठीक करने में यह तकनीक क्रांतिकारी साबित हो सकती है।
नोबेल विजेता तकनीक का जादू इस थेरेपी का आधार जापानी वैज्ञानिक शिन्या यामानाका की खोज है, जिसके लिए उन्हें २०१२ में नोबेल पुरस्कार मिला था। उन्होंने वयस्क कोशिकाओं को वापस ‘मातृ कोशिकाओं’ (iPS Cells) में बदलने का तरीका खोजा था, जो शरीर के किसी भी अंग की कोशिका बन सकती हैं।
विशेषज्ञों की राय हैदराबाद के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जगदेश मादिरेड्डी के अनुसार, भारत जैसे देश के लिए यह विकास बहुत महत्वपूर्ण है, जहाँ हृदय रोग मौतों का सबसे बड़ा कारण हैं। हालांकि, अभी यह थेरेपी शुरुआती चरण में है और इसके दीर्घकालिक प्रभावों के लिए और शोध की आवश्यकता है, लेकिन यह भविष्य की स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक नया दरवाजा खोलता है।