‘भत्ता लें पर वोट न दें!’ बंगाल की जनता को बीजेपी नेता सजल घोष ने दिया ‘अनोखा मंत्र’

पश्चिम बंगाल में चुनाव के करीब आते ही जुबानी जंग और तेज हो गई है। दक्षिण 24 परगना के कुलपी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा नेता सजल घोष ने तृणमूल कांग्रेस सरकार की रोजगार नीति और भत्ता योजनाओं पर जमकर निशाना साधा। सजल घोष ने जनता को सलाह देते हुए कहा कि राज्य सरकार से मिलने वाला भत्ता तो स्वीकार करें, लेकिन वोट देते समय टीएमसी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएं।
रोजगार पर घेरा: सजल घोष ने रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री के पुराने बयानों का मजाक उड़ाते हुए कहा, “सरकार चाहती है कि आम लोगों के बच्चे सड़कों पर घुगनी और चॉप बेचें, जबकि उनका अपना भतीजा (अभिषेक बनर्जी) आलीशान कारों में घूमे। यह बंगाल के युवाओं के साथ सरासर अन्याय है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्थायी नौकरी देने के बजाय लोगों को भत्ते का लालच देकर ‘भिखारी’ जैसा बना रही है।
भत्ते पर विवादित बयान: सजल घोष ने राज्य की लोकप्रिय कल्याणकारी योजनाओं की तुलना भिखारियों की आय से कर डाली। उन्होंने कहा कि मुट्ठी भर पैसे देकर स्वाभिमान नहीं खरीदा जा सकता। उन्होंने मतदाताओं से कहा, “सरकार जो पैसे बांट रही है, वह आपकी मेहनत की कमाई और टैक्स का पैसा है। उसे जरूर लीजिए, लेकिन याद रखिए कि यह पैसा आपके बच्चों के भविष्य की कीमत नहीं हो सकता।”
सजल घोष के इस बयान पर टीएमसी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तृणमूल नेताओं का कहना है कि सजल घोष ने ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं का अपमान कर बंगाल की महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। चुनाव से पहले सजल का यह ‘भत्ता बनाम वोट’ वाला फार्मूला कितना कारगर होता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।