आर्टिकल 311 का होगा इस्तेमाल, दागी ओसी (OC) जाएंगे घर! चुनाव आयोग के कड़े तेवर से बंगाल में हड़कंप

पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राज्य प्रशासन को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इस बार चुनाव के दौरान या बाद में हिंसा हुई, तो इसके लिए सीधे पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। मंगलवार को कोलकाता में मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और डीजीपी पीयूष पांडे के साथ हुई ‘फुल बेंच’ की बैठक में आयोग ने साफ कर दिया कि कोताही बरतने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
पुरानी फाइलों पर नजर: आयोग ने 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा का ब्यौरा मांगा है। उन क्षेत्रों के थाना प्रभारियों (OC) और पर्यवेक्षी अधिकारियों की सूची मांगी गई है जहाँ हिंसा की घटनाएं सबसे अधिक हुई थीं। आयोग यह जानना चाहता है कि उन अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। सूत्रों के मुताबिक, दागी रिकॉर्ड वाले अधिकारियों को चुनावी ड्यूटी से दूर रखा जा सकता है।
सीधे बर्खास्तगी की चेतावनी: ज्ञानेश कुमार ने बैठक में बेहद कड़े लहजे में कहा कि अगर कहीं भी अशांति हुई, तो आयोग संविधान के अनुच्छेद 311 (Article 311) का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकिचाएगा। इस कानून के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी को बिना लंबी जांच के सीधे सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने मुख्य सचिव और डीजीपी को चेतावनी देते हुए कहा, “हमें अधिकारियों को हटाना आता है। यह सुनिश्चित करना आपकी जिम्मेदारी है कि इस बार बंगाल में हिंसा का दोहराव न हो।”
प्रशासन पर दबाव: चुनाव आयोग के इस कड़े रुख ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। आयोग का संदेश साफ है—शांतिपूर्ण चुनाव कराना केवल कागजी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अनिवार्य शर्त है। अब देखना यह है कि आयोग की इस सख्त हिदायत के बाद बंगाल पुलिस जमीनी स्तर पर कितनी सक्रिय नजर आती है।